परिनिष्ठीत भाषा

 परिनिष्ठित भाषा 

    कोई भी भाषा पहले बोली के रूप में जन्म लेती है| उसका प्रारंभिक रूप काफी अनगढ होता है| उसका प्रयोग मनुष्य घर परिवार में करता है| परंतु सभ्यता के विकसित होने पर यह आवश्यक हो जाता है कि यह भाषा क्षेत्र की एक ऐसी बोली मानक मानी जाए जो पूरे क्षेत्र के संबंधी कार्यों के लिए उपयुक्त हो| भाषा के उस रूप परिनिष्ठीत , परिमार्जित, परिष्कृत, मानक, आदर्श, स्तरिय, टक साली आदि कई नामों से जाना जाता है| जो अंग्रेजी के standard शब्द का रुपांतर है| 
1) परिनिष्ठित भाषा की परिभाषाएं -
    1) भाषा विज्ञान कोश -
            किसी भाषा की उस विभाषा को परिनिष्ठित भाषा कहते है, जो अन्य भाषाओं पर अपनी साहित्यिक एवं सांस्कृतिक श्रेष्टता स्थापित कर लेती है| और उन विभाषाओं को बोलनेवाले भी उस भाषा को सर्वाधिक उपयुक्त समझने लगते है| 
  2) डॉ. श्याम सुंदर दास :-
        कई विभाषाओं में व्यवहृत होनेवाली एक शिष्ठ, परिगृहीत विभाषा ही राष्ट्रीय भाषा या टक साली भाषा कहलाती है| 
2) परिनिष्ठित भाषा का क्षेत्र:-
        परिनिष्ठित एक विस्तृत क्षेत्र में प्रयुक्त होती है| इसका एक निश्चित व्याकरण होता है और इसका शिक्षित समाज में सर्वाधिक आदर प्राप्त होता है| वह पूरे क्षेत्र के प्रमुखत: शिक्षित वर्ग के लोगों की शिक्षा, पत्र व्यवहार या समाचार, पत्राधिक भाषा हो जाती है| शासन व्यवस्था, न्याय, साहित्य आदि में भी प्राय: उसी का ही प्रयोग होता है| दैनिक समाचार पत्र, मासिक पत्र, पाठ्यपुस्तक, आदि में भी इसी भाषा का प्रयोग सर्वाधिक मात्रा में होता है| इसके अतिरिक्त आंदोलनों, धार्मिक सम्मेलनों, साहित्यिक गोष्ठियों, चुनाव प्रचार, राजनीतिक सभाओं, सामाजिक अधिवेशणों, आदि के अवसर पर विविध प्रदेशों के शिक्षित एवं शिष्ठ जन इसी परि निष्ठीत भाषा में विचार विनिमय करते है| इतना ही नहीं रेडियो, टेलीविजन चित्रपट आदि में भी इसी भाषा का प्रयोग होता है| हिंदी, मराठी, गुजराती पंजाबी, संस्कृत अंग्रेजी, फ्रेंच, जर्मनी आदि ऐसी ही परि निष्ठीत भाषाएं है| 
3) परिनिष्ठित भाषा का असर :- 
    जब कोई बोली या विभाषा परिनिष्ठीत भाषा बनकर प्रतिनिधी हो जाती है तो आस-पास की बोलियों पर उसका पर्याप्त प्रभाव पडता है| आज की खडी बोली ने ब्रज, अवधि मैथिली आदि सभी बोलियों को प्रभावित किया है| कभी-कभी ऐसा देखा गया है कि मानक या परिनिष्ठित भाषा आस-पास की बोलियों को बिल्कुल समाप्त कर देती है| रोम की लंटिन जब इटली की मानक भाषा बनी तो आस-पास की बोलियां शिघ्र समाप्त हो गयी| मानक भाषा का रूप पूरे क्षेत्र में एक नहीं होता| उस पर प्रादेशिक बोलियों का भी प्रभाव पडता है| व्याकरण, शब्द समूह तथा उच्चारण तीनों में यह प्रभाव देखा जा सकता है| 
उदा. भोजपुरी लोग खडी बोली हिंदी के 'दिखाई दे रहा है' के स्थान पर 'लौक रहा है' 'हमने काम किया' के स्थान पर 'हम काम किए' का प्रयोग करते है| 
4) परिनिष्ठित भाषा के रूप:-
    परिनिष्ठित भाषा के दो रूप है -
1) लिखित 2) मौखिक 
सभी मौखिक भाषाएं प्राय: अपने लिखित रूप से भिन्न होती है| क्यो कि बोलने में सर्वता वाक्य छोटे-छोटे रहते है, जब की लिखित रूप के वाक्य बडे होते है| लिखित रूप मौखिक रूप की अपेक्षा अधिक संस्कृत रहता है और उस पर प्रादेशिकता की छाप भी कम रहती है| 
    संक्षेप में कह सकते है सभ्यता के विकास की दृष्टि से विभाषा ही मानक रूप अपना लेती है और परिनिष्ठित भाषा कहलाती है| 

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