मृदुला गर्ग लिखित 'जादू का कालीन' नाटक का कथ्य
‘जादू का कालीन
मृदुला गर्ग लिखित नाटक है|
इस
नाटक का उद्देश मूलत: बाल कामगारों की समस्याओं को चित्रित करना है|
परंतु
इसके साथ सुखे के कारण गांववालों को भूखमरी की समस्या का सामना करना पड रहा| कारण हाथों को कोई काम नहीं| जंगलों पर शासन का राज आ गया हैं| बारीश न होने की वजह
से सडकों का भी इस साल कोई काम नहीं |इसलिये गांववालों को अपने
छोटे-छोटे बच्चों को कालीन बुनने के काम पर भेजना पडता हैं| कारण
वह बुनने के लिए उंगलियां नाजूक सी, पतली सी होने की जरुरत होती है|
परंतु बच्चे उसी कालीन को जादू का कालीन मानकर कहते है, -
“एक...दो...तीन
उठमउठू : तीन...दो...एक भरनभरू : एक दो तीन... उडनछू|”
अर्थात
बच्चे मुक्ति चाहते है| इसप्रकार बच्चों के शोषण को तो इस नाटक के माध्यम से चित्रित किया है|
परंतु
यह मुक्ति का रास्ता केवल बच्चों के लिये ही नहीं तो जीवन में प्रत्येक समस्या से मुक्ति
दिलाने के लिये कोई जादू की कालीन नहीं आयेगी, तो उस व्यक्ति को ही
अपनी समस्या का रास्ता खुद ढूंढना पडता है, इसे भी इस नाटक के
माध्यम से व्यक्त किया है|
इसकी कथा ‘दो’
अंकों
के ‘चार’
दृश्यों
में हैं|
नाटक
के पात्र
पुरुष पात्र –
रमई, केशो का बाप, तीसरा गांववाला, दलाल-एक, दलाल-दो, (सुपरवाइजर – एक) (सुपरवाइजर – दो ) मालिक, लेबर ऑफिसर, कलेक्टर, ड्राइव्हर,
लडके का बाप |
स्त्री पात्र –
दादी, माई, केशो की मां, समाजसेविका
,पत्रकार
इसके अलावा सात बच्चे हैं- जिसमें तीन लडकियां(
सन्तों, कम्मो, लक्खी) , चार लडके
हैं- ( केशो, लाखन, बरखू , दूसरा लडका (छोटा))
दृश्य
एक
सन्तों
दादी से कहानी सुन रही है |
दादी चक्की चला रही है सन्तों को
चाम्पाद्वीप की राजकुमारी की कहानी बता रहीं है| सन्तों
लेटे-लेटे वह कहानी सुन रही है| रानी के पास इतने मोती थे
जितने हमारे पास चावल के दाने ऐसा दादी कहती है| परंतु
सन्तों कहती है कि हमारे पास तो आज एक भी चावल का दाना नहीं | माई कह रह थी सूखा पडा है| दादी कहती है सच कह रहीं
है, सूखा तो जबर पडा है| न जाने कितने
महिने बीते पानी की एक बूंद नहीं बरसी| अब आंख का पानी भी
सूख गया है| इतने में सन्तों की माई सर पर गटठर लादे भीतर
आती है| एक धौल सन्तों के पीठ पर जामकर उसे काम-धाम करने के
बारे में कहती है| दादी कहती है, आते
ही क्यों उसे पीछे पडी हो|
माई
कहती है कल से सन्तों लकडियां लाने जायेगी| मैं तो सडक कूटने
जाऊंगी| पर दादी शंका व्यक्त करती इस साल सडक बनेगी, इतना सूखा पडा है| माई को लगता है अगर सडक नहीं
बनेगी तो हम भूखों मरेंगे|
इतने
रमई कुदाल लेकर वहां आता है| वह कहता अब की साल सडक नहीं
बनेगी कारण बरखा जो नहीं हुई| माई बीच में ही कहती है, सडक
क्या धंसने को बनाई जाती है| चीज तो बरतने के लिये बनाई जाती
है| रमई थोडा घुस्से में अरे सडक धंसेगी नहीं तो बनेगी कैसे
और हमें काम मिलेगा कैसे? पर यह सब राजनीति है| अब की बार सडक नहीं बनेगी| दादी चिंता व्यक्त करती
है अब हमारा क्या होगा फसल नहीं, कटाई नहीं, सडक भी नहीं बनेगी|
इतने
में संतो कहती है भूख लगी है| माई उसके सिर पर लकडी का गटठर
रखती है और कहती है कल से तू जायेगी लकडियां लाने| लडकी की
जात, ना काम की ना धाम की| सन्तों गटठर
लेकर पडती है| माई उसे गालियां देती है| दादी माई को कहती है, क्यों उसके पीछे पडी है,
लकडिया लाने मैं जाऊंगी|
तुमसे नहीं होगा जंगल तो बहुत दूर है| परंतु दादी अपनी यादें बताती है| परंतु आज जंगल का
भी चित्र बदल गया है| दूर-दूर तक लकडियां नजर नहीं आ रही|
सारी लकडियां शहर चली गई है| जिससे मकान
कारखाने बने है| अब जंगल बचाने के लिये लकडी काटने के लिये
मनाई है| कारण अब जंगल सरकार का है| इसलिये दूर तक जाना पडता है| दादी सन्तों को समझाती है, तू रो मत
तू ढेर सारे कुंदरू, बेरी लाना उसे आचार बनायेंगे|
बुरे दिन हमेशा नहीं रहते|
देसवा का सब धन –धान
बिदेसवा में जाय रहे
महंगी पडत हर साल
किरसक अकुलाय रहे |
इतने
में संतो रोती हुई आती है| ठेकेदार ने भगा दिया, लकडी नहीं मिली, ऐसा कहती| संतो
को भूख लगी है, पर दाना भी नहीं घर में| इसप्रकार सूखे के कारण लोग भूख से तडप रहे हैं| इतने
में केशो का बाप वहां भागते हुए आता है और
रमई को कहता है खैरपुर से कारखानेवाले आए है| काम देने के
लिये आए है| इतने
में सामने दो दलाल आते है|
तब रमई कहता है कि मुझे काम दे दो | तब दलाल कहता
कि तुम क्या सीखोगे? यह तो बच्चों का काम है| परंतु रमई को लडकी है| अब वह किसे भेजे| गांव के
सब बच्चे जा रहे है| परंतु केशो की मां केशों से भेजने से इन्कार
करती है| परंतु केशो के बाप ने उनसे सौ रुपये लिये थे| तब रमई अपनी लडकी को भी लेके
जाने के लिए कहता है| सौ नहीं चाहे अस्सी मिले पर अपनी लडकी
को लेके जाये ऐसे रमई कहता है|
दलाल
संतो को पूछता है,
काम सीखेगी न? वह आगे कहता है, जितनी उंगलियां पतली उतनी कालीन अच्छी | पहिला दलाल
कहता है, जैसा कालीन, वैसा दाम,
जितना दाम, उतना लाभ| दूसरा
दलाल कहता है, तुम्हारी कालीन खरीदने के लिए दूर देश से
राजकुमार आयेगा| केशो बीच में कहता है, परियों के देस से | संतो जाने के तैयार होती है|
परंतु दादी भेजने से इन्कार करती है| तब दलाल
रमई को सौ रुपये देता है| तब वह सन्तों को जाने को कहता है |
उस वक्त दादी, केशो की मां, माई हतबल हो जाती है| केशो सन्तों का हाथ पकडकर
उडनछू हो जाता है| अर्थात दलालों दे साथ वे दोनों चले जाते
है|
यहां पहला दृश्य समाप्त हो जाता है|
दृश्य
दो
पहले अंक का दूसरा दृश्य कालीन कारखाने के शेड
पर घटीत हुआ है|
पहले
दृश्य में देखा कि केशो और संतो दो दलालो
के साथ चले जाते है|
अब वे कारखाने पर पहुंच गये है | वहां उनके
जैसे और लडके और लडकियां हैं| एक तरफ तीन लडके और दूसरी तरफ
तीन लडकियां हैं| सब लुम पर काम कर रहे है| लुम के धागों के बीच से धागा निकालकर गांठ बांधकर चाकू से काट रहे है|दोनों तरफ सुपरवाइजर एक और
सुपरवाइजर दो हाथ में छडी लिये घूम रहें
है|
अर्जेंट का आर्डर होने के
कारण दोनों भी बच्चों कों हाथ चलाने के लिये कह रहे है| सुपरवाइजर दो चाय पीने के लिये बाहर जाता है| सुपरवाइजर
एक सन्तों को हाथ चलाने के लिये कहता है| इतने में धागे से
सन्तों की उंगली कट जाती है और वह चिल्लाने लगती है|
सुपरवाइजर एक उसे उंगली अलग रखने के कहता है| कारण कालीन को
अगर खून लग गया तो कालीन बरबाद होती है| वे कम्मो को धागा
देने को कहते है| जला
हुआ धागा उंगली में भर देता है| सन्तों रोज धागे से
उंगली काट देती है| सुपरवाइजर एक उसे अनाडी कहता है|
सुपरवाइजर एक और सुपरवाइजर
दो अपने- अपने मन की बात व्यक्त करते है| सुपरवाइजर एक कहता
है, मुझे गांव जाना है| मेरा लडका
अंग्रेजी स्कूल में पडता है| अब सातवी में गया है| परंतु उसकी तरफ ध्यान देने के बजाय मुझे इन बंद कमरे काम कर रहें इन
पिल्लों पर ध्यान देना पड रहा है|
सुपरवाइजर दो कहता है कि
मुझे तो मार-पीट बिल्कुल पसंद नहीं पर इस काम में ... कमीसन मिल जाय तो घरवाली को
करधनी करूंगा|
लडकी भी ग्यारह साल की हो गयी है, उसकी शादी
करनी...
इतने में मालिक वहां आते है| वह सुपरवाइजरों सावधान से रहने के लिये कहता है | कारण
एक समाजसेविका और एक पत्रकार महोदया अफवायें फैला रही है कि हम बच्चों का अपहरण
करके लाये है| और दिल्ली से एक डेली गेसन(शिष्टमंडल) आ रहा
है बालमजदूरों की जानकारी लेने के लिए| सुपरवाइजर कहते है,
बच्चों को उनके मां-बाबा ने भेजा है| अगर ऐसा
है, तो बच्चों को वापस भेजते है| फिर
से दूसरे बच्चें लायेंगे | गांव से सस्ते में मजदूर मिलते है
, इसलिये बाहर देश से डॉलर में रुपये मिलते है|
इसलिये मालिक कहते है, अगर कोई आए तो बच्चों को स्टोर के उपरवाले कमरे में बंद करना और तुम लूम
पर बैठ जाना | दोनों छुट्टी और कमीसन की बात करते है|
तब मालिक कहते है, जाओ पहले काम पूरा करके लो|
नहीं तो छुट्टी हमेशा के लिये मिल जायेगी| दोनों
अंदर जाते है और बच्चों को हाथ चलाने के लिये कहते है| बच्चे
इतनी तेजी से हाथ चलाते है कि उनका बदन भी तेजी से कापने लगता है| अंधेरा होने के बाद
काम खत्म किया जाता| तब उन्हें रोटी खाने के लिये दी जाती है| तब रोटी खाते –खाते केशो डालर देश की कहानी बच्चों को सुनावता है| केशो
कहता है कालीन बनने पर हम उडनछू हो जायेगें |केशो सबको कालीन
पर बैठने के लिये कहता है| और पूछता है कहां जाना है|
बरखू कहता है, उटारी गांव जाना है| लक्खी कहती है छिछौरी गांव
जाना है| कम्मो कहती है बनखेडा गांव जाना है| तो संतो कहती है सरसताल गांव जाना है| कालीन पर बैठ
कर सब अपने अपने गांव उतरने का अभिनय करते
है| लाखन को यह पसंद नहीं आता| इसलिये
वह कहता है | गांव जाएंगे भूखों मरने| नहीं
सब हैं हमारे गांव में कुंदरु, बेरी, धान,
पानी | लाखन कहता है कुछ नहीं है तुम्हारे
गांव में | इसलिये तुम्हें बेचा है|
कम्मो कहती है, तुझे बेचा होगा तेरी माई-बापू ने, हम ना बिके|
तब पता चलता है, लाखन का कोई नहीं है, वह अपनी मर्जी का मालिक है| बच्चे उसे चिडाने लगते
है| और सब बच्चे सो जाते है|
दूसरे
दिन सुपरवायजर बच्चों को काम रोकने के लिये कहता है |और उन्हें एक कमरे में ले जाकर कहता है कि अब सब चूप रहेंगे| कोई आवाज नहीं करेगा| लाखन कहता है, क्यों| सुपरवायजर उसे गालियां देता है| पर मालिक ने कहा था कि कोई झंझट नहीं होनी चाहिए, इसलिये
कहता है कि पुलिस आ रही है| तुम स्कूल नहीं जाते इसलिये
तुम्हें और तुम्हारे बापू को पकाडकर ले जायेगी|
उन्हें चूप रहने का आदेश देकर बाहर से ताला
लगाकर सुपरवायजर चला जाता है|
उसके
जाने के बाद लाखन कहता वे झूठ बोल रहे है| कोई पुलिस नहीं
आयेगी| समाजसेवक आयेंगे | अगर आपको
यहां से निकालना है, तो जोर से रो दो| समाज
सेविका सब देखती है| लेबर ऑफिसर भी कहता है, यहां कुछ नहीं है| तब समाजसेविका कालीन खरीदने के
बहाने स्टोअर रूम देखने के बारे में कहती है| इतने में बच्चे
अंदर से चिल्लाने लगते है| समाजसेविका दरवाजा खोलने के लिये
कहती है| बच्चें बाहर भागते हुए आते है और मुक्ति के कारण
नाचने लगते है|
यहां दृश दो और अंक एक समाप्त हो जाता है|
अंक
दो- दृश्य एक
स्थल - गांव का चौपाल
समाजसेविका नलिनी – बच्चों
के रिहैबिलेटेट
कलेक्टर – लडकों
को दुधारू गाय और लडकियों को सिलाई मशीन
देने की बात . |
अमरीकन कंपनी ने क्रॉस ब्रीड गायें हरियाणा सरकार को डोनेट की थी|
लाखन – गाय खावे
की क्या ?
केशो की गाय उसे ही देने की बात करता है|
केशो– पढने की
बात करता है|
रमई – गाय की
सेवा कैसे करेंगें |
माफी मांगता है|
केशो ( आमदसिंह) का बाप –
रिक्सा
की बात |
दादी- जंगल काटने की बात पूछति है| हमें जंगल दो, पानी दो |
पत्रकार (महिला) दिस इयर ऑफ द गर्ल चाइल्ड | आप लडकियों के खिलाफ डीसक्रिमिनेट(भेद)
पत्रकार, दो औरतें, समाजसेविका विरोध | पटना जाना है , सी.एम से मिलने|
अंक
दो- दृश्य दो
स्थल - गांव का चौपाल - समय शाम- क्वार का महीना
गांव
के सारे बच्चे जिसमें संतो, दूसरी लडकी, तीसरी लडकी, दूसरा
लडका , लाखन हैं| सब आसमान की ओर इशारा
कर बदली आयेगी, बरखा, होगी, घास उगेगी,गाय खावेगी, दूध
देगी .. ऐसा सपना देख रहें| लाखन कहता है, कि बदली नहीं, जादू की कालीन है| केशो ने कहानी बताई थी | सब को भूख लगी है| परंतु खाने को कुछ नहीं है| फिर बच्चे गाना गाते
वहां से निकल जाते है|
मंच के पीछे से गायों के रंभाने की आवाज आती है|
गांव
के लोग,
जिसमें रमई, केशो का बाप, तीसरा गांववाला गायों को कलेक्टर
को वापस लौटाने के लिये उनके पास पहुंचे थे| कारण गायों की
हड्डीयां अलग-अलग हो गयी है| गोहत्या का पाप कलेक्टर अपने सर
पर नहीं लेना चाहता | अत: वे गायों को वापस लेने से इन्कार
करता है| वह लोगों को कहता है, सिलाई मशीने दे रहा था | टांग
अडाने के लिये लेकर आते हो, समाजसेवक,
पत्रकार को|
रमई और केशो का बाप कहता है कि तीन हप्ते हुए
कोई मजूरी नहीं और तीन महिने हुए सूखा पडा हुआ |कलेक्टर कहते
है, अब कुछ नहीं कर सकता| नाराज होकर वे अपनी गायों को कसाई को बेचते हैं|
जिससे केवल सौ रुपये मिलते है|
इतने
माई कहती है,
दूसरे कसाई आए है| अर्थात केशो का बाप संतो के
रिश्ते के लिये लडका लेकर आया था| माई संतो को लेकर आती है
और चबुतरे पर बिठाती है| लडके का बाप लडकी को मरगिल्ली कहता | केशो का बाप संतो कितनी होशियार है, यह लडके के बाप
को समझाता है|कालीन बनाने में ट्रेंड है| काम की पक्की है| खेत पर कराओ या खड्डी पे बिठलाओ|
तो लडके का बाप कहता है, हम गाय-भैस वाले है|
साथ
में जो लडका है,
उसकी तरफ इशारा करके रमई पूछता है, ए लडका है|
ए तो लडके का छोरा है| इसकी माई गुजर गई है...
लडका दुहेजू है, इसलिये
सस्ते में सौदा करने के लिए केशो का बाप कहता है|
चार
सौ में सौदा करते है|
इतने में दो लडकियां वहां भागती हुई आती है और रमई के पीछे छुप जाती
है| और कहती है कि वो राक्षस आया है| इतने
में सुपरवाजर वहां आता है|
वह
कहता है कि अठ्ठारह साल से कम उम्र की लडकी की शादी करना गुनाह है| यह शादी नहीं हो सकती| रमई कहता है, आप ले जाओ |
अब नहीं भागेगी| इतने में सुपर वायजर कहता है,
चौदह बरस से खड्डी पर काम करना जुर्म है| पुलिस
पकड कर ले जायेगी|
फिर भी रमई ले जाने के लिये कहता है| तब लाखन विरोध
करता है|
सुपर वायजर बाकी बच्चों के बारे में पूछता है| इतने में लडके का बाप जाने लगता है| केशो का बाप
उन्हें रोकता है| रमई, केशों की मां और
तीसरा गांववाला लडकियों को पकडकर एक लाईन में खडा कर देता है|
सुपर वायजर और लडके का बाप लडकियों का निरीक्षण
करते है |
सब की सब लडकियां उन्हें मरागिल्ली लगती है| अत:
सुपर वायजर काम देने से इन्कार करता है|
लाखन कहता है कि आपने तो कहा था कि काम सिखने से
ज्यादा पैसा मिल जायेगा|
सुपर वायजर लाखन को गांव से निकालने के लिये कहता है| इतने में दादी लकडियों गठ्ठर
लेकर वहां आती है| और सुपर वायजर को ही निकाल देती है| यह सब देख लडके के बाप चार सौ का
व्यवहार अब तीन सौ में करना चाहता है| कारण लडकियां कमजोर है|
दादी
कहती है,
हमें दुहेजू से लडकी नहीं ब्याहनी| तब लडके का
बाप दो लडकियों का व्यवहार करने की बात कहता है, साढे- छह सौ
देने की बात करता है| दादी इन्कार करती है और कहती है, केशो की तरह ए भी शहर जायेगी और कामायेगी| यह सब देख लडके के बाप चार सौ का व्यवहार अब
तीन सौ में करना चाहता है| कारण लडकियां कमजोर है|
दादी
कहती है,
हमें दुहेजू से लडकी नहीं ब्याहनी| तब लडके का
बाप दो लडकियों का व्यवहार करने की बात कहता है, साढे- छह सौ
देने की बात करता है| दादी इन्कार करती है और कहती है, केशो की तरह ए भी शहर जायेगी और कामायेगी| यह सब देख लडके के बाप चार सौ का व्यवहार अब
तीन सौ में करना चाहता है| कारण लडकियां कमजोर है|
दादी
कहती है,
हमें दुहेजू से लडकी नहीं ब्याहनी| तब लडके का
बाप दो लडकियों का व्यवहार करने की बात कहता है, साढे- छह सौ
देने की बात करता है| दादी इन्कार करती है और कहती है, केशो की तरह ए भी शहर जायेगी और कामायेगी| इतने में केशो आता हुआ नजर आता है| वह अपनी कहानी बताता है, कि वह वहां जाकर पढ नहीं सका पर घरेलू नौकर बन गया था|
एक भले मानुस ने समझाने पर केशो गांव वापस आया था काम करने|
शहर
में भी कुछ नहीं मिला यह देख लडके का बाप दो सौ में व्यवहार करना चाहता है|संतो की शादी की बात सून केशो दादी को यह शादी रोकने के लिये कहता है|
जादू का कालीन भाग 1
जादू का कालीन भाग 2
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