राम भक्ति शाखा की विशेषताएं
समस्त हिंदी साहित्य में हिंदी का भक्तिकाल अपना विशेष स्थान रखता है|जिसके कारण भक्तिकाल को सुवर्ण युग कहा जाता है| आ. रामचंद्र शुक्ल के अनुसार भक्तिकाल का समय सन 1375 से 1700 तक माना जाता है| उपासना के आधार पर भक्तिकाल का विभाजन निर्गुणधारा और सगुण धारा इस प्रकार किया है| सगुण काव्यधारा के अंतर्गत रामभक्ति काव्य और कृष्ण भक्ति काव्य आ जाता है| राम को आराध्य मानकर जिन सगुण कवियों णे राम का वर्णन किया है और राम भक्ति काव्य की प्रतिष्ठा को हिंदी सहीय के अंतर्गत चरमसीमा तक पहुंचाया है| उन रामभक्त कवियों ने तुलसीदास का स्थान सर्व श्रेष्ठ है| तुलसीदास केकाव्य साहित्य ध्यान में रखकर रामभक्ति शाखा की विशेषताएं निम्नांकित रूप में देखी जां सकती है-
1) आराध्य राम
2) दिव्य रूप राम
3) शक्ति और शीलयुक्त राम
4) मर्यादा पुरुषोत्तम राम
5) भक्ति भावना
6) दास्य भक्ति
7) समन्वय भावना
8) विविध रसों की अभिव्यक्ति
9) काव्य के विविध रूप
10) प्रकृति चित्रण
11) लोकतत्व का चित्रण
12) भाषा का प्रयोग
13) छंद विधान
14) अलंकार विधान
1) आराध्य राम :-
हिंदी राम काव्य की एक यही विशेषता है कि सभी कवियों नें राम को हि आराध्य माना है इतनाही नहीं तो सभी कवि रामभक्त है| इन सभी में तुलसीदास का स्थान श्रेष्ठ माना जाता है| उनके राम संस्कृत कवि वाल्मीकि के राम की तरह नहीं है| बल्की नरत्व से देवत्व की ओर पहुंचे हुए भगवान है| उन्होंने
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