भाषा और बोली में अन्तर
बोली और भाषा के बीच स्पष्ट विभाजक रेखा खिंचना अत्यंत कठिन है| वस्तुत: यह केवल नाम है, जो शास्त्रीय विवेचन के लिए आवश्यक है| जब बोली ही किन्हीं कारणों से प्रमुखता प्राप्त कर लेती है, तो भाषा कहलाने लगती है||
अ.नं |
भाषा |
बोली |
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1) |
भाषा का क्षेत्र व्यापक होता है | अर्थात भाषा का व्यवहार अधिक
दूर तक होता है| उदा. हिंदी भाषा दिली, राजस्थान , बिहार, हरियाणा उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश तक फैली हुई है| |
बोली का क्षेत्र सीमित होता है अर्थात बोली का व्यवहार भाषा की तुलना में कम दूर तक होता है| उदा. हिंदी की सबसे बडी बोली कौरवी केवल दस जिलों में बोली जाती है| |
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2) |
एक भाषा के अंतर्गत अनेक बोलियां होती है| |
अनेक बोली के अंतर्गत अनेक भाषाएं नहीं होती |
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3) |
विभिन्न भाषाओं में बोधगम्यता नहीं होती| अर्थात विभिन्न भाषाएं बोलनेवाले एक
दूसरे को नहीं समझ सकते| खडी बोली में ‘जाता हूं’ बोलनेवाला अंग्रेजी का ‘I go’ नहीं समझेगा| कारण हिंदी और अंग्रेजी दो
अलग-अलग भाषाएं है| |
किसी भाषा के बोली में परस्पर बोधगम्यता होती है|अर्थात विभिन्न बोलियां बोलनेवाले एक
दूसरे को समझ सकते है| जैसे खडीबोली में ‘जाता हूं’ बोलनेवाला ‘ब्रज
भाषा के ‘जात हौं अनायास समझेगा| कारण
खडीबोली और ब्रज हिंदी की बोलियां हैं| |
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4) |
भाषा का प्रयोग साहित्य, शिक्षा, शासन, न्याय,
उद्योग, व्यवसाय, पत्रिका
जैसे क्षेत्रों में होता है| |
बोली का प्रयोग परिवार और दैनंदिन व्यवहार के लिए होता है| लेकिन यह स्थिति स्थूल दृष्टि से ग्राह्य
है| कारण आधुनिक काल में पूर्व हिंदी का सारा साहित्य तथा
कथित बोलियों में लिखा गया है| |
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5) |
भाषा व्याकरण के नियमों से अनुशासित होती है| |
बोली के लिए व्याकरण के नियमों की आवश्यकता नहीं होती| यही कारण हैं की बोली भाषा की तुलना में
अधिक तेजी से बदलती हैं| |
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6) |
भाषा का मानक परिनिष्ठित रूप होता है| |
बोली का कोई मानक रूप नहीं होता| |
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7) |
भाषा बोली की तुलना में अधिक प्रतिष्ठित होती है| परिणामस्वरूप औपचारिक परिस्थितियों में
प्राय: लोग बोली के बदले भाषा का प्रयोग करते है| |
भाषा की तुलना में बोली को अधिक प्रतिष्ठा नहीं होती| |
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8) |
अपने क्षेत्र के बाहर के लोगों से बातचित करते समय भाषा
का प्रयोग करते है| |
अपने क्षेत्र के लोगों से बातचित करते समय बोली का प्रयोग
करते है| |
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9) |
भाषा बोली का ही विकसित रूप होती है, अतः उसमें आगे विकास की संभावनाएं बोली की तुलना में कम रहती है।
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बोली में विकास के निरंतर संभावनाएं बनी रहती है, बोली ही विकसित अवस्था में भाषा कहलाती है| बोली अधिक जीवित अवस्था है।
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10) |
भाषा का राजनीतिक, साहित्यिक एवं व्यक्तित्व का प्रभाव पड़ता है| वह विशेष व्यक्तियों द्वारा प्रभावित होती है| उसके निर्माण में विद्वानों तथा समस्त शैलियों का योगदान होता है।
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बोली इन प्रभावों से बिल्कुल नहीं प्रभावित होती है|वह तो वाणी संबंधी नियम, उनके
अनुकूल प्रभाव स्वभाव से निर्मित होती है| बोली तो सामूहिक विकास में विकास करती है| विशेष व्यक्तियों या शैलीकरण का यथार्थ जीवन के चित्रण के लिए मूल्य का
बड़ा योगदान होता है। |
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11) |
भाषा का उत्थान- पतन, विकास आदि राजनीतिक कारणों पर अधिक निर्भर करता है| राजनीतिक कारणों से भाषा का महत्व बढ़ता-घटता है| 1956 के बाद गुजराती का प्रयोग गुजरात की राजभाषा के रूप में
होने लगा तो उसका गौरव पहले से ही अधिक हुआ| |
बोली का उत्थान- पतन, विकास मूल रूप से सामाजिक कारणों पर निर्भर करता है| राजनीतिक प्रभावों से बोली राजभाषा या साहित्य भाषा बन जाती है| मुगल काल में या भक्ति युग में ब्रज-अवधि आदि का भाषा रूप में विकास और पदोन्नयन इसका प्रमाण है। |
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12) |
भाषा शिक्षा का माध्यम होती है| |
बोली शिक्षा का माध्यम नहीं होती| |
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13) |
कोर्ट कचहरी के और अन्य प्रशासनिक कार्यों में भी भाषा का ही उपयोग होता है, न कि बोलियों का| न्यायालय के फैसले अवधि या सौराष्ट्री में नहीं लिखे जाते, तो हिंदी या गुजराती में लिखे जाते हैं। |
प्रशासनिक कार्य का माध्यम बोली नहीं होती| न तो कचहरी में वकील बोली का प्रयोग करते
है, न न्यायाधीश| न ही आदेश, फैसले आदि बोली
में लिखे जाते हैं। |
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14) |
भाषा प्रकृति से रूढीग्रस्त या परंपराग्रस्त अर्थात कंजरवेटिव होती है| अतः व्याकरण के नियमों से बद्ध होती है| वह अपनी प्राचीन रूप को सुरक्षित रखने में प्रवृत्त रहती है| |
बोली प्रकृति से सहज उदार होती है, अर्थात लिबरल होती है| अतः
व्याकरण के नियमों जकड़ी
नहीं जाती| उसे व्याकरण के नियम बांध नहीं पाते| वह किसी प्रकार की संकीर्णता नहीं पालती| |
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15) |
बोली बोलने वालों की संख्या की तुलना में भाषा बोलने
वालों की संख्या अधिक होती है। हिंदी बोलने वालों की तुलना में भोजपुरी, बज, अवधि, छत्तीसगढ़ी आदि बोलने वालों के संख्या कम ही है जनगणना के समय इन सब की भाषा
हिंदी ही लिखी जाती है| |
भाषा की तुलना में बोली बोलने की संख्या कम होती है| गुजरात के कुछ भाषिक सौराष्ट्रीय, कुछ सुरति, कुछ बोली
बोलते हैं| जनगणना के समय सभी की भाषा गुजराती ही लिखी जाती है।
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