नीलोत्पल मृणाल का जीवन परिचय एवं व्यक्तित्व
21 वीं सदी की नई पीढी के
सर्वाधिक लोकप्रिय लेखकों में नीलोत्पल मृणाल एक है । जिन्हें 2016 में साहित्य अकादमी
से पुरस्कृत किया गया है| अपनी लेखनी से हिंदी साहित्य जगत में उन्होंने अपना एक स्थान
निर्माण किया है| अत: उनके साहित्य से परिचित होने से पूर्व उनके व्यक्तित्व से परिचित
होना उतना ही आवश्यक है कारण कोई भी लेखक अपने पारिवारिक, सामाजिक, सांस्कृतिक परिस्थितियों
से प्रभावित होकर ही साहित्य लेखन करता है| इस दृष्टि से नीलोत्पल मृणाल का जीवन का
परिचय निम्नलिखित रूप में देख सकते है|
जीवनवृत्त:-
नीलोत्पल मृणाल का जन्म सन् 25
दिसंबर 1984 में बिहार के मुंगेर जिला, संग्रामपुर नामक कस्बे में हुआ है। वर्तमान में यह झारखंड के दुमका जिला
में, नोनीहाट आता है। वह मूलतः बिहार के निवासी हैं, परंतु झारखंड राज्य के गठन के कारण अब वे झारखंड वासी हो गए हैं। यही कारण
है कि उनके व्यक्तित्व में बिहार और झारखंड की झलकियां सर्वत्र दिखाई देती हैं।
नीलोत्पल मृणाल का विवाह सन 2022 में
डी.एस.पी अनीता शर्मा प्रभा के साथ झारखंड के नोनीहाट में हुआ। अनीता शर्मा का
जन्म मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले की छोटी से इलाके कोतमा में हुआ है। मध्य प्रदेश
की दबंग डी.एस.पी अनीता प्रभा शर्मा ने शादी के बाद फेसबुक पेज पर लिखा था-'पिस्तौल और कलम. मेरे हरदम मेरे हरदम।' दोनों लंबे
समय तक रिलेशन में थे। सद्यःस्थिति में दोनों झारखंड के दुमका जिले के नोनीहाट में
रहते है।
नीलोत्पल मृणाल की आरंभिक शिक्षा अपने ही
राज्य झारखंड के नोनीहाट में हो गयी है। इसके पश्चात इन्होंने अपना दाखिला सेंट
जेवियर्स विद्यालय,
रांची से किया है। आगे जाकर वही पर सन 2005
में बी.ए (इतिहास) में किया। जब वे अपने कॉलेज में थे तब उन्होंने कई सारे
आंदोलनों में हिस्सा लिया। पढ़ाई पूरी होने के पश्चात सिविल सेवा की परीक्षा की
तैयारी करने लगे। उस तैयारी के वजह से यह सन 2008 में दिल्ली
में गए और मुखर्जी नगर में रहने लगे। वही पर अगले 8 वर्षों
तक निरंतर परीक्षा देते रहे। लेकिन दुर्भाग्यवश एक भी परीक्षा में वह उत्तीर्ण ना
हो सके। लेखक ने एक जगह बताया है कि यह किसी अच्छी कंपनी में कार्य करने के जितने
साक्षर हो गए थे। लेकिन इनको समाज सेवा करना था जिस वजह से यह सिविल सेवा की
परीक्षा की तैयारी कर रहे थे। लेकिन जब यह यूपीएससी परीक्षा में उत्तीर्ण ना हो
सके। तबसे उन्होंने लेखन का सहारा लेकर समाज के कई सारे मुद्दों को लोगों तक
पहुंचाने का प्रयास कर रहे है।
निलोत्पल मृणाल कई सारे विवादों में फंसे
हैं। जैसे एक बार लल्लनटॉप वेबसाइट द्वारा बिहारी लोगों का अपमान करते हुए एक
तस्वीर को लगाया था। जिस का विरोध उन लोगों ने किया और तस्वीर को हटाने के लिए
कहा। साथही इनके ऊपर एक महिला ने आरोप लगाते हुए फेसबुक के ऊपर एक पोस्ट डाला।
उसमें कहा है कि इन्होंने मुझे शादी का झांसा देकर मुझे शारीरिक व मानसिक तरीके से
प्रताड़ित किया हैं। इसलिए उसने थाने में दुष्कर्म का मामला दर्ज कराया है। यह
महिला गोरखपुर की रहने वाली थी जो दिल्ली में यूपीएससी की तैयारी कर रही थी। इसकी
आयु लगभग 32 वर्ष बताई जाती थी। इनके जीवन में कई सारे विवाद है। कुल मिलाकर इन्होंने
अपने करियर को बनाने के लिए बहुत मेहनत की है। तब जाकर यह वर्तमान समय में इस मुकाम
पर पहुंचे हैं।
व्यक्तित्व :-
निलोत्पल जी का व्यक्तित्व बहुआयामी है| वह
लेखक के साथ-साथ एक कवि,
सोशल मीडिया, सामाजिक और राजनीतिक रूप से
प्रभावित है। नीलोत्पल मृणाल साहित्य अकादमी से पुरस्कृत प्राप्त लेखक है। आज उनकी
किताबें बेस्ट सेलर की श्रेणी में आती है। कुछ वर्षों से नीलोत्पल मृणाल अब मंचों
पे बतौर कवि सक्रिय हैं और बेहद लोकप्रिय भी। कई मंचों पर बतौर स्पीकर इनकी
मौजूदगी रहती है। जिसके वीडियो वह अपने यूट्यूब चैनल के जरिए शेयर करते रहते हैं।
जिसमें शैक्षणिक संस्थानों के सेमिनार से लेकर जोश टॉक और टेड टॉक जैसे प्लेटफार्म
भी शामिल हैं। यू-ट्यूब और इन्स्टाग्राम पे भी युवाओं से जुड़ने हेतु इनकी
सक्रियता है जहां लाख से अधिक लोग जुड़े हुए हैं।
बिहार के साहित्यकार लेखक नीलोत्पल मृणाल
की वेशभूषा सफेद या कलर का शर्ट, कोट, जीन्स और कंधे
में हमेशा गमछा रहता है। कंधे पर गमछा रखने के कारण दिल्ली के रेस्तरां में घुसने
से रोका, इसके विरोध में डेढ़ लाख लोग उतरे। गमछा के हवाले सोशल
मीडिया पर छाया बिहारी पहनावा, कई युवा, लेखक व साहित्यकार नीलोत्पल मृणाल के पक्ष में मिल चुके है। ये सभी लोग
रेस्तरां में हुई घटना के विरोध में आवाज उठा रहे हैं। विदेश में काम कर रहे बिहार
और यूपी के प्रबुद्ध वर्ग भी इसपर आपत्ति जता रहे हैं। नीलोत्पल ने कहा- "देश
में कई लोगों के साथ ऐसा पहले भी हुआ लेकिन किसी ने इसका विरोध नहीं किया। मैंने
जब अपनी बात फेसबुक पर लिखी तो कई लोग सामने आए। कही लोगों ने कहा कि मेरे साथ भी
ऐसा हुआ है। सवाल यह है कि जो हो रहा था वो मुद्दा क्यों नहीं बन पाया। वेशभूषा को
लेकर भेदभाव कितना सही है? मैं यह संदेश देना चाहता हूं कि
आपको वेशभूषा, खान-पान व कल्चर के लिए डिमोरलाइज नहीं होना
चाहिए।"
नीलोत्पल मृणाल का कृतित्व-
नीलोत्पल मृणाल नई पीढ़ी के सर्वाधिक
लोकप्रिय लेखक में से एक है। वे युवा पीढ़ी के लब्ध-प्रतिष्ठ उपन्यासकार हैं। युवा
साहित्यकार नीलोत्पल मृणाल आज के समय में निरंतर सृजनरत रहकर हिंदी साहित्य में
उपन्यास, ऑडियो बुक, कविता और गीत लिखते हैं। हिंदी और
भोजपुरी साहित्य में भी बहुत लोकप्रिय हैं। कहीं मंचों पर सफल वक्ता के रूप में
मौजूद रहते हैं। जिसमें शैक्षणिक संस्थाओं के सेमिनार से लेकर जो जोश स्टॉक
(वार्ता) जैसे अनेक प्लेटफार्म पर भी शामिल है।जिसकी जानकारी इस प्रकार –
1) उपन्यास –
1) डार्क हॉर्स
– 2025
2) औघड – 2019
3) यार जादुगार – 2021
4) विश्व गुरु
- 2026
2) अन्य साहित्य -
उपन्यास साहित्य के साथ नीलोत्पल मृणाल
के कई सारी कविताएँ एवं लोग गीत की भी चर्चा रही हैं। जो मंचपर इसका गायन करते
हैं।
कविताएँ एवं लोक गीत
2.
लडे लड़कियाँ बढो लड़कियों।
3.
ये रिल बनाने वाले लड़के।
4.
मुट्टी भर के ले के हम जमीन।
5.
बचपन के वो प्यारे प्यारे दिन कहां गए।
6.
सपने ऊँचाई पर थे सोने चटाई पर थे।
7.
एक नौकरी के चक्कर में सिकंदर भी हार गया।
8.
कहां गया हल मेरा दिन वो सलोना है।
9.
हां मैं बिहारी हूँ।
10.
एही नदी के तीर।
11.
गेहूँ बोएंगे आसमान में।
12.
पटना वाले लड़कों।
13.
दालमोठ भार कटोरी रखा है सामने।
14.
चल साधो कोई देश।
15.
ओ मां यह दुनिया।
16.
जगत माटी का ठेला रे आदी।
कविताएं और गीत के साथ-साथ जगमग करें में संसार भोजपुरी जैसे
कविता और गीत भी लिखे हैं।
ऑडियो बुक और श्रृंखला
1.
स्टोरिटेल ओरिजिनल्स के जखबाबा (2019)
2.
श्रव्य के लिए डार्लिंग डेमोक्रेसी (2020)
पुरस्कार-
इन्होंने कई सारे प्रसिद्ध उपन्यासों को
लिखा है। जिसकी वजह से इनको कई पुरस्कार प्राप्त हुए है। इनके पहले ही उपन्यास 'डार्क
हॉर्स-एक अनकही दास्तां' के लिए सन् 2016 में साहित्य अकादमी (भारत सरकार) द्वारा युवा पुरस्कार प्राप्त हुआ। साथ
ही इनको बिहार का गौरव सम्मान भी दिया गया है। 2023 में
झारखंड गौरव सम्मान से सम्मानित किया है। सोशल मीडिया पर भी उनकी बड़ी जबरदस्त फॅन
फॉलोइंग है।
इस प्रकार निलोत्पल मृणाल ऐसे लेखक है जिन्होंने
कम समय में हिंदी साहित्य जगत अपना स्थान निर्माण किया है| उन्होंने अपने लेखन,
सामाजिक कार्य और जन जागरण के माध्यम से युवा
वर्ग में अपनी एक अलग पहचान बनाई है|
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