भाषा के परिवर्तन के कारण

 भाषा के परिवर्तन के कारण 

        भाषा के परिवर्तनशीलता से तात्पर्य है - 'भाषा का विकास'| लेकिन यहां इस बात का ध्यान रखना आवश्यक है कि भाषा का विकास यानी भाषा उंची होना नहीं है| बल्की विकास का अर्थ केवल आगे बढना या परिवर्तन है| भाषा का परिवर्तन हमेशा कठिनता से सरलता की ओर होता है| भाषा के विकास पर अनेक विद्वानों ने विचार प्रस्तुत किए है| जिसमें पतंजलि, वामन, कांत्यायन, कैयट, स्टुर्टवेंट, येस्पर्सन आदि| परंतु इस विषय पर गंभीरता से और व्यवस्थित रूप से विचार करनेवाले प्रथम व्यक्ति निश विद्वान जे. एच. ब्रेड्सडार्फ है| इन्होने ने भाषा के विकास के कारणों को डॉ वर्गों में विभाजित किया है| -

1) आंतरिक (अभ्यंतर) कारण 

2) बाहरी (बाह्य)  कारण 

1) आंतरिक (अभ्यंतर) कारण 

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