आदिकालीन राजनीतिक परिस्थिति

 आदिकालीन राजनीतिक परिस्थिति 

    किसी भी युग का साहित्य अपनी युग की उपज होता है| किसी भी युग के साहित्य पर तत्कालीन राजनीतिक, सामजिक, धार्मिक, सांस्कृतिक परिस्थिति यों का प्रभाव पडता है, इसे ही युगीन परिस्थितियां कहा जाता है| आदिकालीन साहित्य पर भी युगीन परिस्थिति का प्रभाव पडा है| जिसमें से राजनीतिक और सामाजिक परिस्थिति का परिचय निम्नलिखित रूप में देख सकते है|

राजनीतिक परिस्थिति- 

        राजनीति का गहरा असार मनुष्य के जीवन पर होता है| इसी कारण साहित्य की दृष्टि से भी राजनीतिक परिस्थिति महत्वपूर्ण बनती है| आदिकालीन राजनीतिक स्थिति इस प्रकार -

1) केंद्रिय सत्ता का ऱ्हास और छोटे-छोटे राज्यों की स्थापना -

    सम्राट हर्षवर्धन के निधन के पश्चात उत्तरी भारत में केंद्रिय सत्ता का ऱ्हास हो गया| अनेक छोटे-छोटे राज्य स्वतंत्र हो गए| वे आपस में ही लढते रहे| मुसलमानों ने एक-एक राजा को पराजित किया और अपने साम्राज्य का विस्तार किया| उस युग में तीन शक्तिशाली राज्य थे- दिल्ली में तोमर, अजमेर में चौहान, कनौज में गाहडवान| परंतु तीनों आपस में ही लढते रहे| एकत्रित होकर विदेशी आक्रमणों का सामना नहीं किया, अत: विदेशी आक्रमणों के सामने इन्हें पराजित होना पडा|

2) संकुचित राष्ट्रीयता की भावना -

    इस युग में संकुचित राष्ट्रीयता की भावना थी| प्रत्येक राजा अपने छोटे राज्य को ही राष्ट्र मानता था| यही कारण है कि विदेशी आक्रमणों का एकत्रित होकर सामना नहीं किया गया| सभी राष्ट्र के राजा आपस में ही लढते रहे और एक-एक करके पराजित होते रहे|

3) महमूद गजनवी और शहाबुद्दीन गौरी के आक्रमण -

    सिंध को प्रवेश द्वार बनाकर भारत पर मुसलमानों के आक्रमण पर आक्रमण होते रहे| दसवीं शताब्दी के अंत में गजनवीं का राज्य महमूद गजनवी के हाथ में आ गया| उसने भारत पर अनेक आक्रमण किए| भारत के समृद्ध मंदिरों को लूटा| मुर्तियों को तोड डाला| सोमनाथ, कनौज के समृद्ध मंदिरों को लूटा| बाद गजनी का राज्य शहाबुद्दीन गौरी के हाथ में आया| उसने शक्तिशाली राजा पृथ्वीराज चौहान पर आक्रमण किए| अनेक बार गौरी पराजित हुआ, परंतु अंत में पृथ्वीराज चौहान पराजित हुआ| इस तरह धीरे-धीरे उत्तर भारत में मुसलमानों का राज्य विस्तार होता गया|

4) अव्यवस्था, गृहकलह और पराजय का युग -

    राजनीतिक दृष्टि से आदिकाल का युग काल काल है| यह युग अव्यवस्था, गृहकलह और पराजय का युग है| एक ओर मुसलमानों के आक्रमण पर आक्रमण होते रहे और दूसरी ओर देश के राजा आपस में लढते रहे| यह हिंदु राजा परस्पर लढने में ही अपनी शक्ति नष्ट करते रहे और परिणामस्वरूप उन्हें पराजित होना पडा| हर वक्त चारों ओर युद्धों का वातावरण बना रहा| 

निष्कर्षत: कहा जा सकता है कि आदिकाल का युग भारतीय इयिहास का पतन का काल है| हिंदू सत्ता के धीरे-धीरे समाप्त होणे और मुस्लीम सत्ता के उदय  होने की कहानी हैं| इस राजनीतिक परिस्थिति यों का आदिकाल के साहित्य पर प्रभाव पडा|  

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